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Meri Yatra: Antar Ki Or (Hindi - मेरी यात्रा: अंतर की ओर) by Vandana Kathuria

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क्या होगा, अगर एक दिन आपके भीतर एक आवाज़ जागे, जो पूछे, “मैं कौन हूँ?”


"मेरी यात्रा : अनंत की ओर" एक ऐसी ही आवाज़ की कहानी है। एक साधारण गृहिणी, एक माँ, एक पत्मी, जिसने कभी खुद को साधक नहीं माना, धीरे-धीरे पाती है कि जीवन की हर यटना, हर रिश्ता, हर हानि, उसे भीतर की ओर धकेल रही है।


गुरू की खोज से शुरू होकर, बचपन के अनकहे इशारों से गुजरते हुए, गृहस्थी के संचर्षी, ज्योतिष और भक्ति के मागों से होते हुए, कोरोना के अकेलेपन और अपनों को खोने के गहरे दर्द तक, यह यात्रा हर मोड़ पर एक ही सवाल की ओर लौटती है, क्या हम वाकई वही हैं, जो हम खुद को समझते हैं?


कर्म चक्रव्यूह से एसेंशन तक, पाँचवें आयाम से मोनाड की ओर, लेखिका अपने सबसे निजी, सबसे सच्चे अनुभवों पाठकों के सामने खोलकर रख देती हैं, बिना किसी लाग-लपेट के।


यह किताब किसी गुरू का प्रवचन नहीं है। यह एक साथी साधक की डायरी है, जिसने खुद रास्ता टटोला, गिरी, उठी, और चलती रही।

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